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ramayan 5.35.12: वे सर्वत्र बड़ी भक्ति से पूजे जाते हैं। वे तेजस्वी और परम तेजस्वी हैं, ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हैं, मुनियों पर कृपा करते हैं और अपने आचरण से शुभ कर्मों का प्रचार करना जानते हैं। 12॥   |   ramayan सर्ग 5.35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.35.12 
अर्चिष्मानर्चितोऽत्यर्थं ब्रह्मचर्यव्रते स्थित:।
साधूनामुपकारज्ञ: प्रचारज्ञश्च कर्मणाम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वे सर्वत्र बड़ी भक्ति से पूजे जाते हैं। वे तेजस्वी और परम तेजस्वी हैं, ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हैं, मुनियों पर कृपा करते हैं और अपने आचरण से शुभ कर्मों का प्रचार करना जानते हैं। 12॥
 
He is worshiped everywhere with great devotion. They are radiant and supremely bright, remain engaged in observing the vow of celibacy, show favor to sages and know how to propagate good deeds through their conduct. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)