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श्लोक 5.35.11  |
रामो भामिनि लोकस्य चातुर्वर्ण्यस्य रक्षिता।
मर्यादानां च लोकस्य कर्ता कारयिता च स:॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| 'भामिनी! श्री रामचन्द्रजी संसार के चारों वर्णों की रक्षा करते हैं। वे ही संसार में धर्म की मर्यादा स्थापित करते हैं और उसका पालन करते हैं॥ 11॥ |
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| ‘Bhamini! Shri Ramchandraji protects all the four castes of the world. He is the one who sets the limits of religion in the world and enforces them.॥ 11॥ |
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