श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.35.11 
रामो भामिनि लोकस्य चातुर्वर्ण्यस्य रक्षिता।
मर्यादानां च लोकस्य कर्ता कारयिता च स:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'भामिनी! श्री रामचन्द्रजी संसार के चारों वर्णों की रक्षा करते हैं। वे ही संसार में धर्म की मर्यादा स्थापित करते हैं और उसका पालन करते हैं॥ 11॥
 
‘Bhamini! Shri Ramchandraji protects all the four castes of the world. He is the one who sets the limits of religion in the world and enforces them.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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