श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 35: सीताजी के पूछने पर हनुमान जी का श्रीराम के शारीरिक चिह्नों और गुणों का वर्णन करना तथा नर-वानर की मित्रता का प्रसङ्ग सुनाकर सीताजी के मन में विश्वास उत्पन्न करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.35.1 
तां तु रामकथां श्रुत्वा वैदेही वानरर्षभात्।
उवाच वचनं सान्त्वमिदं मधुरया गिरा॥ १॥
 
 
अनुवाद
वानरों में श्रेष्ठ हनुमानजी के मुख से श्री रामचंद्रजी की चर्चा सुनकर विदेहराजकुमारी सीता मधुर वाणी में शान्त स्वर में बोलीं-॥1॥
 
Hearing the discussion of Shri Ramchandraji from the mouth of Hanumanji, the best of the monkeys, Videharajkumari Sita spoke peacefully in a sweet voice -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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