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ramayan 5.34.9: जैसे ही हनुमान निकट आये, सीता को संदेह होने लगा कि वह रावण हो सकता है।   |   ramayan सर्ग 5.34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.34.9 
यथा यथा समीपं स हनूमानुपसर्पति।
तथा तथा रावणं सा तं सीता परिशङ्कते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही हनुमान निकट आये, सीता को संदेह होने लगा कि वह रावण हो सकता है।
 
As Hanuman came closer, Sita began to suspect that he might be Ravana.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)