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ramayan 5.34.8: दुःखी सीता के ये शब्द सुनकर पवनपुत्र हनुमान उनके निकट गये।   |   ramayan सर्ग 5.34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.34.8 
तस्यास्तद् वचनं श्रुत्वा हनूमान् मारुतात्मज:।
सीताया: शोकतप्ताया: समीपमुपचक्रमे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
दुःखी सीता के ये शब्द सुनकर पवनपुत्र हनुमान उनके निकट गये।
 
Hearing these words of grief-stricken Sita, Hanuman, the son of the wind, went close to her.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)