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ramayan 5.34.7: सीता और हनुमान का यह मिलन (एक दूसरे को देखकर) उन दोनों को अत्यंत प्रसन्नता हुई। वे दोनों आश्वस्त होकर आपस में बातें करने लगे॥7॥   |   ramayan सर्ग 5.34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.34.7 
तयो: समागमे तस्मिन् प्रीतिरुत्पादिताद्भुता।
परस्परेण चालापं विश्वस्तौ तौ प्रचक्रतु:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सीता और हनुमान का यह मिलन (एक दूसरे को देखकर) उन दोनों को अत्यंत प्रसन्नता हुई। वे दोनों आश्वस्त होकर आपस में बातें करने लगे॥7॥
 
This meeting (seeing each other) of Sita and Hanuman gave immense happiness to both of them. Both of them became confident and started talking to each other. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)