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ramayan 5.34.27: सीता का निश्चय समझकर पवनपुत्र हनुमान्‌ ने कानों को सुख देने वाले अनुकूल वचन कहकर उनका आनन्द बढ़ाया और कहा-॥27॥   |   ramayan सर्ग 5.34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.34.27 
सीताया निश्चितं बुद्‍ध्वा हनूमान् मारुतात्मज:।
श्रोत्रानुकूलैर्वचनैस्तदा तां सम्प्रहर्षयन्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
सीता का निश्चय समझकर पवनपुत्र हनुमान्‌ ने कानों को सुख देने वाले अनुकूल वचन कहकर उनका आनन्द बढ़ाया और कहा-॥27॥
 
Understanding Sita's resolve, Hanuman, the son of the wind, increased her joy by speaking favorable words that were pleasant to the ears and said -॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)