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ramayan 5.34.14: यदि तू स्वयं मायावी रावण है और मायावी शरीर में प्रवेश करके पुनः मुझे कष्ट दे रहा है, तो यह तेरे लिए अच्छा नहीं है॥14॥   |   ramayan सर्ग 5.34: सीताजी का हनुमान् जी के प्रति संदेह और उसका समाधान तथा हनुमान् जी के द्वारा श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.34.14 
मायां प्रविष्टो मायावी यदि त्वं रावण: स्वयम्।
उत्पादयसि मे भूय: संतापं तन्न शोभनम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यदि तू स्वयं मायावी रावण है और मायावी शरीर में प्रवेश करके पुनः मुझे कष्ट दे रहा है, तो यह तेरे लिए अच्छा नहीं है॥14॥
 
If you yourself are the illusory Ravana and have entered an illusory body and are again troubling me, then this is not good for you.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)