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ramayan 5.31.17: उसकी बातें सुनकर जनकनंदिनी सीता को बड़ा आश्चर्य हुआ। उनके बाल घुंघराले और अत्यंत सुंदर थे। डरपोक सीता ने बालों से ढका हुआ अपना मुख ऊपर उठाया और अशोक वृक्ष की ओर देखा।   |   ramayan सर्ग 5.31: हनुमान जी का सीता को सुनाने के लिये श्रीराम-कथा का वर्णन करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 31: हनुमान जी का सीता को सुनाने के लिये श्रीराम-कथा का वर्णन करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.31.17 
जानकी चापि तच्छ्रुत्वा विस्मयं परमं गता।
तत: सा वक्रकेशान्ता सुकेशी केशसंवृतम्।
उन्नम्य वदनं भीरु: शिंशपामन्ववैक्षत॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उसकी बातें सुनकर जनकनंदिनी सीता को बड़ा आश्चर्य हुआ। उनके बाल घुंघराले और अत्यंत सुंदर थे। डरपोक सीता ने बालों से ढका हुआ अपना मुख ऊपर उठाया और अशोक वृक्ष की ओर देखा।
 
Hearing his words, Janakanandini Sita was very surprised. Her hair was curly and very beautiful. The timid Sita raised her face covered by her hair and looked towards the Ashoka tree.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)