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ramayan 5.31.15-16: "मैंने श्री रघुनाथजी के मुख से जो रूप, रंग और गुण सुने थे, उन्हीं के समान जानकीजी को पाया है।" ऐसा कहकर वानरराज हनुमान्‌जी चुप हो गए ॥15-16॥   |   ramayan सर्ग 5.31: हनुमान जी का सीता को सुनाने के लिये श्रीराम-कथा का वर्णन करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 31: हनुमान जी का सीता को सुनाने के लिये श्रीराम-कथा का वर्णन करना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  5.31.15-16 
यथारूपां यथावर्णां यथालक्ष्मवतीं च ताम्॥ १५॥
अश्रौषं राघवस्याहं सेयमासादिता मया।
विररामैवमुक्त्वा स वाचं वानरपुंगव:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
"मैंने श्री रघुनाथजी के मुख से जो रूप, रंग और गुण सुने थे, उन्हीं के समान जानकीजी को पाया है।" ऐसा कहकर वानरराज हनुमान्‌जी चुप हो गए ॥15-16॥
 
"I have found Janaki to be exactly like the form, colour and characteristics I had heard about from Sri Raghunatha's mouth." Having said this, the chief of the monkeys, Hanuman became quiet. ॥15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)