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ramayan 5.31.14-15h: मैं भी उनमें से एक हूँ। सम्पातीक की सलाह पर मैं महानेत्रों वाली विदेहनन्दिनी की खोज में सौ योजन फैले हुए समुद्र को शीघ्रतापूर्वक पार करके यहाँ आया हूँ।॥14 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.31: हनुमान जी का सीता को सुनाने के लिये श्रीराम-कथा का वर्णन करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 31: हनुमान जी का सीता को सुनाने के लिये श्रीराम-कथा का वर्णन करना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  5.31.14-15h 
अहं सम्पातिवचनाच्छतयोजनमायतम्॥ १४॥
तस्या हेतोर्विशालाक्ष्या: समुद्रं वेगवान् प्लुत:।
 
 
अनुवाद
मैं भी उनमें से एक हूँ। सम्पातीक की सलाह पर मैं महानेत्रों वाली विदेहनन्दिनी की खोज में सौ योजन फैले हुए समुद्र को शीघ्रतापूर्वक पार करके यहाँ आया हूँ।॥14 1/2॥
 
‘I am also one of them. On the advice of Sampātik, I have come here quickly crossing the sea which is spread over a hundred yojnas in search of the great-eyed Videhanandini.॥ 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)