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ramayan 5.30.43: मैं श्री राम के सब सन्देश मधुर वाणी में कहूँगा, जिससे सीता को उनके वचनों पर विश्वास हो जाए। जिस प्रकार उनके मन का संशय दूर हो गया है, उसी प्रकार मैं सब बातों का समाधान करूँगा।॥ 43॥   |   ramayan सर्ग 5.30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.30.43 
श्रावयिष्यामि सर्वाणि मधुरां प्रब्रुवन् गिरम्।
श्रद्धास्यति यथा सीता तथा सर्वं समादधे॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
मैं श्री राम के सब सन्देश मधुर वाणी में कहूँगा, जिससे सीता को उनके वचनों पर विश्वास हो जाए। जिस प्रकार उनके मन का संशय दूर हो गया है, उसी प्रकार मैं सब बातों का समाधान करूँगा।॥ 43॥
 
I will tell all the messages of Shri Ram in a sweet voice so that Sita believes in his words. Just as the doubts in her mind are dispelled, I will resolve all matters in the same way.'॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)