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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.30.32 
विशस्ते वा गृहीते वा रक्षोभिर्मयि संयुगे।
नान्यं पश्यामि रामस्य सहायं कार्यसाधने॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
यदि राक्षस मुझे युद्ध में मार डालें या पकड़ लें, तो श्री रघुनाथजी का कार्य पूरा करने के लिए मुझे दूसरा कोई सहायक नहीं दिखाई देता।
 
If the demons kill me in the fight or capture me, then I do not see any other helper to complete the task of Sri Raghunathji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)