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ramayan 5.30.29: यदि बहुत से फुर्तीले राक्षस मुझे घेरकर पकड़ लें, तो सीता की इच्छा पूरी नहीं होगी और मैं भी पकड़ लिया जाऊँगा॥ 29॥   |   ramayan सर्ग 5.30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.30.29 
मां वा गृह्णीयुरावृत्य बहव: शीघ्रकारिण:।
स्यादियं चागृहीतार्था मम च ग्रहणं भवेत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
यदि बहुत से फुर्तीले राक्षस मुझे घेरकर पकड़ लें, तो सीता की इच्छा पूरी नहीं होगी और मैं भी पकड़ लिया जाऊँगा॥ 29॥
 
If a number of nimble demons surround me and capture me, then Sita's wish will not be fulfilled and I too will be captured.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)