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ramayan 5.30.28: मैं चारों ओर से उनसे घिरा हुआ राक्षसों की सेना का विनाश तो कर सकता हूँ, परंतु समुद्र के उस पार नहीं पहुँच सकता॥ 28॥   |   ramayan सर्ग 5.30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.30.28 
संरुद्धस्तैस्तु परितो विधमे राक्षसं बलम्।
शक्नुयां न तु सम्प्राप्तुं परं पारं महोदधे:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मैं चारों ओर से उनसे घिरा हुआ राक्षसों की सेना का विनाश तो कर सकता हूँ, परंतु समुद्र के उस पार नहीं पहुँच सकता॥ 28॥
 
Surrounded by them from all sides, I can destroy the army of demons, but I cannot reach the other side of the ocean.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)