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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.30.21 
ततो जातपरित्रासा शब्दं कुर्यान्मनस्विनी।
जानाना मां विशालाक्षी रावणं कामरूपिणम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जब उसके मन में भय उत्पन्न होगा, तब बड़ी-बड़ी आंखों वाली यह बुद्धिमान सीता मुझे अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप धारण करने वाला रावण समझकर जोर-जोर से चिल्लाने लगेगी।
 
When fear arises in her mind, this intelligent Sita with big eyes will think of me as Ravana who can assume any form as per his wish and will start screaming loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)