Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.30.15: यदि मैं उन्हें सान्त्वना दिए बिना लौट जाऊँ और अपने स्वामी वानरराज सुग्रीव को श्री रामजी का कार्य पूरा करने के लिए प्रेरित करूँ, तो उनका वानर सेना सहित यहाँ आना व्यर्थ हो जाएगा (क्योंकि सीताजी तो उसके पहले ही प्राण त्याग देंगी)।॥ 15॥ | ramayan सर्ग 5.30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि वोद्योजयिष्यामि भर्तारं रामकारणात्।
व्यर्थमागमनं तस्य ससैन्यस्य भविष्यति॥ १५॥
अनुवाद
यदि मैं उन्हें सान्त्वना दिए बिना लौट जाऊँ और अपने स्वामी वानरराज सुग्रीव को श्री रामजी का कार्य पूरा करने के लिए प्रेरित करूँ, तो उनका वानर सेना सहित यहाँ आना व्यर्थ हो जाएगा (क्योंकि सीताजी तो उसके पहले ही प्राण त्याग देंगी)।॥ 15॥
If I return without consoling them and exhort my master, the monkey king Sugreeva, to accomplish Sri Rama's task, then his coming here with the monkey army will be in vain (because Sita would give up her life before that).॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥