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ramayan 5.30.14: यदि मैं सीता का संदेश लिए बिना यहाँ से लौट जाऊँगा, तो ककुत्स्थ कुल के रत्न भगवान राम अपनी क्रोधपूर्ण और असह्य दृष्टि से मुझे जलाकर भस्म कर देंगे॥ 14॥   |   ramayan सर्ग 5.30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.30.14 
सीतासंदेशरहितं मामितस्त्वरया गतम्।
निर्दहेदपि काकुत्स्थ: क्रोधतीव्रेण चक्षुषा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं सीता का संदेश लिए बिना यहाँ से लौट जाऊँगा, तो ककुत्स्थ कुल के रत्न भगवान राम अपनी क्रोधपूर्ण और असह्य दृष्टि से मुझे जलाकर भस्म कर देंगे॥ 14॥
 
If I return from here without taking Sita's message, then Lord Rama, the jewel of the Kakutstha clan, will burn me to ashes with his wrathful and unbearable glance.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)