श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.30.12 
अनेन रात्रिशेषेण यदि नाश्वास्यते मया।
सर्वथा नास्ति संदेह: परित्यक्ष्यति जीवितम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं इस रात्रि के बीतने से पहले सीता को सांत्वना न दूँ तो इसमें कोई संदेह नहीं कि वह अपने प्राण त्याग देगी॥12॥
 
If I do not console Sita before this night passes, there is no doubt that she will give up her life altogether.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)