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ramayan 5.30.1: महाबली हनुमान् ने भी सीता का विलाप, त्रिजटा का स्वप्न-वर्णन और राक्षसियों की डाँट-फटकार स्पष्ट रूप से सुनी।॥1॥   |   ramayan सर्ग 5.30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 30: सीताजी से वार्तालाप करने के विषय में हनुमान जी का विचार करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.30.1 
हनुमानपि विक्रान्त: सर्वं शुश्राव तत्त्वत:।
सीतायास्त्रिजटायाश्च राक्षसीनां च तर्जितम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
महाबली हनुमान् ने भी सीता का विलाप, त्रिजटा का स्वप्न-वर्णन और राक्षसियों की डाँट-फटकार स्पष्ट रूप से सुनी।॥1॥
 
The mighty Hanuman also heard clearly the lamentation of Sita, the dream narrative of Trijata and the scoldings of the demonesses. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)