श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  5.3.51 
प्रविश्य शापोपहतां हरीश्वर
पुरीं शुभां राक्षसमुख्यपालिताम्।
यदृच्छया त्वं जनकात्मजां सतीं
विमार्ग सर्वत्र गतो यथासुखम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
वानरों के स्वामी! राक्षसराज रावण द्वारा पोषित यह सुन्दर नगरी शाप से नष्ट होने को है। अतः इसमें प्रवेश करो और अपनी इच्छानुसार सर्वत्र पतिव्रता एवं सदाचारिणी जनकनन्दिनी सीता की खोज करो।॥ 51॥
 
Lord of the monkeys! This beautiful city, nurtured by the demon king Ravana, is almost destroyed by a curse. Therefore, enter it and search for the chaste and virtuous Janakanandini Sita everywhere as per your wish.'॥ 51॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे तृतीय: सर्ग:॥ ३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें तीसरा सर्ग पूरा हुआ॥ ३॥
 
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