श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  5.3.50 
तत् प्रविश्य हरिश्रेष्ठ पुरीं रावणपालिताम्।
विधत्स्व सर्वकार्याणि यानि यानीह वाञ्छसि॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे वानरश्रेष्ठ! अतः आप कृपा करके रावण द्वारा शासित इस नगरी में प्रवेश करें और यहाँ जो भी कार्य करना चाहें, उसे पूर्ण करें॥ 50॥
 
O best of the monkeys! Therefore, please enter this city ruled by Ravana and complete all the tasks you wish to perform here.॥ 50॥
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