श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.3.46 
इदं च तथ्यं शृणु मे ब्रुवन्त्या वै हरीश्वर।
स्वयं स्वयम्भुवा दत्तं वरदानं यथा मम॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
वानरराज! मैं आपसे एक सच्ची बात कह रहा हूँ। कृपया उसे सुनिए। मैं आपसे वह वरदान कह रहा हूँ जो स्वयंभू ब्रह्मा ने मुझे दिया था। ॥46॥
 
Monkey lord! I am telling you a true thing. Please listen to it. I am telling you the boon that the self-born Brahma himself had given me. ॥ 46॥
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