vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना
»
श्लोक 40
श्लोक
5.3.40
तत: संवर्तयामास वामहस्तस्य सोऽङ्गुली:।
मुष्टिनाभिजघानैनां हनुमान् क्रोधर्मूच्छित:॥ ४०॥
अनुवाद
फिर उसने अपने बाएँ हाथ की उँगलियाँ मोड़कर मुट्ठी बाँधी और बड़े क्रोध से लंका पर घूँसा मारा ॥40॥
Then he folded the fingers of his left hand and made a fist and in great anger he punched Lanka. ॥ 40॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd
Download Vedamrit Android App
Install
×