Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.3.4: वह अलकापुरी जैसी शक्तिशाली सेनाओं द्वारा सुरक्षित था। उस नगरी के सुंदर द्वार उन्मत्त हाथियों से सुशोभित थे। उस नगरी के भीतरी और बाहरी दोनों द्वार श्वेत आभा से सुशोभित थे।   |   ramayan सर्ग 5.3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.3.4 
सुपुष्टबलसम्पुष्टां यथैव विटपावतीम्।
चारुतोरणनिर्यूहां पाण्डुरद्वारतोरणाम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वह अलकापुरी जैसी शक्तिशाली सेनाओं द्वारा सुरक्षित था। उस नगरी के सुंदर द्वार उन्मत्त हाथियों से सुशोभित थे। उस नगरी के भीतरी और बाहरी दोनों द्वार श्वेत आभा से सुशोभित थे।
 
It was protected by powerful armies like Alakapuri. Mad elephants adorned the beautiful gates of that city. Both the inner and outer gates of that city were decorated with white luster. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)