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ramayan 5.3.39: लंका से इस प्रकार बुरी तरह पराजित होने पर पवनपुत्र और वानरश्रेष्ठ परम पराक्रमी हनुमान्‌ ने बड़े जोर से गर्जना की ॥39॥   |   ramayan सर्ग 5.3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.3.39 
तत: स हरिशार्दूलो लंकया ताडितो भृशम्।
ननाद सुमहानादं वीर्यवान् मारुतात्मज:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
लंका से इस प्रकार बुरी तरह पराजित होने पर पवनपुत्र और वानरश्रेष्ठ परम पराक्रमी हनुमान्‌ ने बड़े जोर से गर्जना की ॥39॥
 
On being beaten thus severely by Lanka, that most valiant Hanuman, son of the wind and the best of the apes, roared very loudly. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)