श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.3.36 
मामनिर्जित्य दुर्बुद्धे राक्षसेश्वरपालिताम्।
न शक्यं ह्यद्य ते द्रष्टुं पुरीयं वानराधम॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
अरे दुष्ट बुद्धि वाले नीच वानर! मैं राक्षसराज रावण द्वारा संरक्षित हूँ। मुझे परास्त किए बिना तुम आज इस नगर को नहीं देख सकते।'
 
You lowly monkey with a wrong mind! I am being protected by the demon king Ravana. You cannot see this city today unless you defeat me.'
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