श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.3.29 
न शक्यं मामवज्ञाय प्रवेष्टुं नगरीमिमाम्।
अद्य प्राणै: परित्यक्त: स्वप्स्यसे निहतो मया॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'मुझे अनदेखा करके इस नगर में किसी का प्रवेश संभव नहीं है। आज मेरे हाथों मारे जाने पर तुम इस पृथ्वी पर निर्जीव पड़े रहोगे।'
 
‘It is not possible for anyone to enter this city by ignoring me. Today, after being killed by my hands, you will lie lifeless on this earth.
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