श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.3.23 
कस्त्वं केन च कार्येण इह प्राप्तो वनालय।
कथयस्वेह यत् तत्त्वं यावत् प्राणा धरन्ति ते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे वनभटकने वाले वानर! तुम कौन हो और यहाँ क्यों आए हो? जब तक जीवित रहो, मुझे अपने यहाँ आने का ठीक-ठीक कारण बताओ॥ 23॥
 
Forest wandering monkey! Who are you and why have you come here? As long as you are alive, tell me the exact reason for your coming here.॥ 23॥
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