श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.3.22 
पुरस्तात् तस्य वीरस्य वायुसूनोरतिष्ठत।
मुञ्चमाना महानादमब्रवीत् पवनात्मजम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वह वीर पवनपुत्र के सामने खड़ी होकर जोर से गर्जना करके उससे इस प्रकार बोली -॥22॥
 
She stood before the brave son of the wind and roared loudly and spoke to him thus -॥ 22॥
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