श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.3.20 
अथ सा हरिशार्दूलं प्रविशन्तं महाकपिम्।
नगरी स्वेन रूपेण ददर्श पवनात्मजम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, श्रेष्ठ वानर और महावानर पवनकुमार हनुमान्‌ उस मन्दिर में प्रवेश करने लगे। इतने में ही उस नगर की अधिष्ठात्री देवी लंका ने अपने स्वाभाविक रूप में प्रकट होकर उन्हें देखा॥20॥
 
Thereafter, Pawan Kumar Hanuman, the best monkey and great monkey, started entering that temple. Meanwhile, Goddess Lanka, the presiding deity of that city, appeared in her natural form and saw him. 20॥
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