श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.3.17 
समीक्ष्य च महाबाहो राघवस्य पराक्रमम्।
लक्ष्मणस्य च विक्रान्तमभवत् प्रीतिमान् कपि:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तब महाबाहु श्री राम और लक्ष्मण के पराक्रम का विचार करके कपिवर हनुमान्‌जी को बहुत प्रसन्नता हुई॥17॥
 
Then, thinking about the bravery of mighty-armed Shri Ram and Lakshman, Kapivar Hanuman felt very happy. 17॥
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