श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  5.3.15-16 
कुमुदाङ्गदयोर्वापि सुषेणस्य महाकपे:।
प्रसिद्धेयं भवेद् भूमिर्मैन्दद्विविदयोरपि॥ १५॥
विवस्वतस्तनूजस्य हरेश्च कुशपर्वण:।
ऋक्षस्य कपिमुख्यस्य मम चैव गतिर्भवेत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
केवल कुमुद, अंगद, महाकपि सुषेण, मैन्द, द्विविद, सूर्यपुत्र सुग्रीव, वानर कुशपर्वा तथा वानर सेना के प्रधान वीर राजा जाम्बवान् और मैं भी इस पुरी के अन्दर पहुँच सकते हैं।’ 15-16॥
 
Only Kumud, Angad, Mahakapi Sushen, Mainda, Dwivid, Sun's son Sugriva, monkey Kushaparva and the brave king Jambavan, the chief of the monkey army, and I can also reach inside this Puri.' 15-16॥
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