श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.3.14 
नेयमन्येन नगरी शक्या धर्षयितुं बलात्।
रक्षिता रावणबलैरुद्यतायुधपाणिभि:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
रावण के सैनिक अपने हाथों में शस्त्र लेकर इस नगर की रक्षा करते हैं, इसलिए कोई दूसरा इसे बलपूर्वक नहीं ले सकता।॥14॥
 
Ravana's soldiers protect this city with weapons in their hands, so no one else can capture it by force.॥ 14॥
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