श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 3: लंकापुरी का अवलोकन करके हनुमान् जी का विस्मित होना, निशाचरी लंका का उन्हें रोकना और उनकी मार से विह्वल होकर प्रवेश की अनुमति देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.3.13 
तां समीक्ष्य पुरीं लंकां राक्षसाधिपते: शुभाम्।
अनुत्तमामृद्धिमतीं चिन्तयामास वीर्यवान्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
दैत्यराज लंका की वह सुन्दर नगरी श्रेष्ठ एवं परम वैभवशाली थी। उसे देखकर महाबली हनुमान्‌जी इस प्रकार विचार करने लगे-॥13॥
 
That beautiful city of the demon king Lanka was the best and most prosperous. Seeing it, the mighty Hanuman began to think like this -॥ 13॥
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