Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.27.53: ‘देखो, यह पक्षी तुम्हारे सामने वाली शाखा पर अपने घोंसले में बैठा हुआ बार-बार मधुर और सुखदायक शब्द बोल रहा है। इसके कंठ से ‘सुस्वागतम्’ की ध्वनि निकल रही है और इससे वह हर्ष से भर रहा है, मानो बार-बार आने वाले सौभाग्य की सूचना दे रहा हो अथवा आने वाले प्रियतम का स्वागत करने के लिए प्रेरित कर रहा हो।’॥53॥ | ramayan सर्ग 5.27: त्रिजटा का स्वप्न, राक्षसों के विनाश और श्रीरघुनाथजी की विजय की शुभ सूचना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पक्षी च शाखानिलयं प्रविष्ट:
पुन: पुनश्चोत्तमसान्त्ववादी।
सुस्वागतां वाचमुदीरयाण:
पुन: पुनश्चोदयतीव हृष्ट:॥ ५३॥
अनुवाद
‘देखो, यह पक्षी तुम्हारे सामने वाली शाखा पर अपने घोंसले में बैठा हुआ बार-बार मधुर और सुखदायक शब्द बोल रहा है। इसके कंठ से ‘सुस्वागतम्’ की ध्वनि निकल रही है और इससे वह हर्ष से भर रहा है, मानो बार-बार आने वाले सौभाग्य की सूचना दे रहा हो अथवा आने वाले प्रियतम का स्वागत करने के लिए प्रेरित कर रहा हो।’॥53॥
‘Look, this bird sitting in its nest on the branch in front of you is repeatedly speaking sweet and soothing words. The sound of ‘Suswagatam’ is coming out of its voice and by this it is filled with joy as if it is repeatedly informing about the good fortune or is motivating to welcome the beloved who is coming.’॥ 53॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥