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ramayan 5.27.52: उनकी उत्तम बायीं जांघ भी, जो हाथी की सूँड़ के समान है, इस प्रकार काँप रही है, मानो यह संकेत दे रही हो कि श्री रघुनाथजी शीघ्र ही तुम्हारे सामने प्रकट होंगे॥ 52॥   |   ramayan सर्ग 5.27: त्रिजटा का स्वप्न, राक्षसों के विनाश और श्रीरघुनाथजी की विजय की शुभ सूचना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.27.52 
करेणुहस्तप्रतिम: सव्यश्चोरुरनुत्तम:।
वेपन् कथयतीवास्या राघवं पुरत: स्थितम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
उनकी उत्तम बायीं जांघ भी, जो हाथी की सूँड़ के समान है, इस प्रकार काँप रही है, मानो यह संकेत दे रही हो कि श्री रघुनाथजी शीघ्र ही तुम्हारे सामने प्रकट होंगे॥ 52॥
 
His most excellent left thigh, which is like the trunk of an elephant, is also trembling as if to indicate that soon Sri Raghunatha will appear before you.॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)