श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 27: त्रिजटा का स्वप्न, राक्षसों के विनाश और श्रीरघुनाथजी की विजय की शुभ सूचना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  5.27.51 
ईषद्धि हृषितो वास्या दक्षिणाया ह्यदक्षिण:।
अकस्मादेव वैदेह्या बाहुरेक: प्रकम्पते॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
इस उदार हृदया विदेह राजकुमारी की बायीं भुजा किसी उत्तेजना के कारण सहसा काँपने लगी है (यह भी सौभाग्य का लक्षण है)। 51॥
 
‘The left arm of this generous-hearted Videha princess has suddenly started trembling due to some excitement (this is also a sign of good luck). 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)