श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 27: त्रिजटा का स्वप्न, राक्षसों के विनाश और श्रीरघुनाथजी की विजय की शुभ सूचना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  5.27.50 
निमित्तभूतमेतत् तु श्रोतुमस्या महत् प्रियम्।
दृश्यते च स्फुरच्चक्षु: पद्मपत्रमिवायतम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
उसकी बड़ी बाईं आँख कमल के पत्ते जैसी फड़कती हुई दिखाई दे रही है। यह इस बात का संकेत है कि उसे जल्द ही कोई बहुत ही सुखद बातचीत सुनने को मिलेगी।
 
‘His large left eye, like a lotus leaf, is seen fluttering. This is an indication that he will soon hear a very pleasant conversation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)