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अर्थसिद्धिं तु वैदेह्या: पश्याम्यहमुपस्थिताम्।
राक्षसेन्द्रविनाशं च विजयं राघवस्य च॥ ४९॥
अनुवाद
अब मैं देख रहा हूँ कि जानकी की अभीष्ट इच्छा पूर्ण होने वाली है। राक्षसराज रावण का विनाश और रघुनाथजी की विजय होने में अब अधिक समय नहीं रह गया है॥ 49॥
‘Now I can see that Janaki's desired wish is going to be fulfilled. There is not much time left in the destruction of the demon king Ravana and the victory of Raghunath ji.॥ 49॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥