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ramayan 5.27.4: उन दुष्ट राक्षसों द्वारा सीता को इस प्रकार भयभीत होते देख, निद्रा से जागी हुई वृद्धा राक्षसी त्रिजटा उनसे बोली -॥4॥   |   ramayan सर्ग 5.27: त्रिजटा का स्वप्न, राक्षसों के विनाश और श्रीरघुनाथजी की विजय की शुभ सूचना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.27.4 
सीतां ताभिरनार्याभिर्दृष्ट्वा संतर्जितां तदा।
राक्षसी त्रिजटा वृद्धा प्रबुद्धा वाक्यमब्रवीत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उन दुष्ट राक्षसों द्वारा सीता को इस प्रकार भयभीत होते देख, निद्रा से जागी हुई वृद्धा राक्षसी त्रिजटा उनसे बोली -॥4॥
 
Seeing Sita being frightened in this manner by those wicked demons, the old demoness Trijata, who had just woken up from sleep, said to them -॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)