श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 27: त्रिजटा का स्वप्न, राक्षसों के विनाश और श्रीरघुनाथजी की विजय की शुभ सूचना  »  श्लोक 18-20h
 
 
श्लोक  5.27.18-20h 
ततोऽन्यत्र मया दृष्टो राम: सत्यपराक्रम:॥ १८॥
लक्ष्मणेन सह भ्रात्रा सीतया सह वीर्यवान्।
आरुह्य पुष्पकं दिव्यं विमानं सूर्यसंनिभम्॥ १९॥
उत्तरां दिशमालोच्य प्रस्थित: पुरुषोत्तम:।
 
 
अनुवाद
इसके बाद मैंने दूसरे स्थान पर देखा कि सत्यनिष्ठ और पराक्रमी पुरुषोत्तम भगवान् राम अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ सूर्य के समान तेजस्वी दिव्य पुष्पक विमान पर सवार होकर यहाँ से उत्तर दिशा की ओर प्रस्थान कर रहे हैं॥18-191/2॥
 
After this, I saw at another place, the Supreme Being, Lord Rama, who is truthful and powerful, along with His wife Sita and brother Lakshman, riding on the divine Pushpak aircraft which was as radiant as the sun, set out from here towards the north.॥ 18-19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)