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श्लोक  5.27.17-18h 
पाण्डुरर्षभयुक्तेन रथेनाष्टयुजा स्वयम्।
इहोपयात: काकुत्स्थ: सीतया सह भार्यया॥ १७॥
शुक्लमाल्याम्बरधरो लक्ष्मणेन सहागत:।
 
 
अनुवाद
तब मैंने देखा कि ककुत्स्थ कुल के रत्न भगवान राम, आठ श्वेत वृषभों से जुते हुए रथ पर सवार होकर, श्वेत पुष्पों की माला और वस्त्र पहने हुए, अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ यहाँ आये हैं॥17 1/2॥
 
Then I saw that Lord Rama, the jewel of the Kakutstha clan, riding on a chariot drawn by eight white bulls, wearing a garland of white flowers and clothes, has arrived here along with his wife Sita and brother Lakshman.॥ 17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)