श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 27: त्रिजटा का स्वप्न, राक्षसों के विनाश और श्रीरघुनाथजी की विजय की शुभ सूचना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  5.27.15-16h 
भर्तुरङ्कात् समुत्पत्य तत: कमललोचना॥ १५॥
चन्द्रसूर्यौ मया दृष्टा पाणिभ्यां परिमार्जती।
 
 
अनुवाद
इसके बाद कमल-नेत्र सीता अपने पति के चरणों से ऊपर कूदकर चन्द्रमा और सूर्य के पास पहुँच गईं। वहाँ मैंने देखा कि वे अपने दोनों हाथों से चन्द्रमा और सूर्य को पोंछ रही हैं - उन्हें सहला रही हैं।*॥15 1/2॥
 
‘After this, lotus-eyed Sita jumped above her husband's feet and reached the moon and the sun. There I saw that she was wiping the moon and the sun with her two hands - stroking them*॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)