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श्लोक 14-15h
श्लोक
5.27.14-15h
ततस्तस्य नगस्याग्रे ह्याकाशस्थस्य दन्तिन:॥ १४॥
भर्त्रा परिगृहीतस्य जानकी स्कन्धमाश्रिता।
अनुवाद
'तब आकाश में उस पर्वत शिखर पर खड़ी हुई जानकी भी अपने पति के द्वारा पकड़े हुए उस हाथी के कंधे पर सवार होकर आ पहुँचीं॥14 1/2॥
‘Then standing on that mountain peak in the sky, Janaki also arrived on the shoulder of that elephant held by her husband.॥ 14 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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