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ramayan 5.27.13-14h: तत्पश्चात अपने तेज से सूर्य के समान प्रकाशित होते हुए तथा श्वेत माला और श्वेत वस्त्र धारण किए हुए वे दोनों भाई श्री राम और लक्ष्मण जानकीजी के पास आए॥13 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.27: त्रिजटा का स्वप्न, राक्षसों के विनाश और श्रीरघुनाथजी की विजय की शुभ सूचना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.27.13-14h 
ततस्तु सूर्यसंकाशौ दीप्यमानौ स्वतेजसा॥ १३॥
शुक्लमाल्याम्बरधरौ जानकीं पर्युपस्थितौ।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात अपने तेज से सूर्य के समान प्रकाशित होते हुए तथा श्वेत माला और श्वेत वस्त्र धारण किए हुए वे दोनों भाई श्री राम और लक्ष्मण जानकीजी के पास आए॥13 1/2॥
 
After that, shining like the sun with their brilliance and wearing white garlands and white clothes, those two brothers Shri Ram and Lakshman came to Janakiji. 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)