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श्लोक  5.27.12-13h 
राघवश्च पुनर्दृष्टश्चतुर्दन्तं महागजम्॥ १२॥
आरूढ: शैलसंकाशं चकास सहलक्ष्मण:।
 
 
अनुवाद
मैंने पुनः श्री रघुनाथजी को देखा, जो लक्ष्मण के साथ चार दांतों वाले एक विशाल हाथी पर बैठे थे, जो पर्वत के समान ऊँचा था और अत्यंत शोभायमान था।
 
I saw Sri Raghunatha once again, sitting with Lakshman on a huge elephant with four teeth, which was as tall as a mountain, looking very graceful. 12 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)