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ramayan 5.26.9: यह राक्षस अपने क्रूर स्वभाव के कारण न तो मेरे मना करने पर ध्यान देता है, न अपने महत्व को समझता है, न अपने कुल की प्रतिष्ठा का विचार करता है। यह बार-बार मुझे वश में करने की इच्छा रखता है॥9॥   |   ramayan सर्ग 5.26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.26.9 
प्रत्याख्यानं न जानाति नात्मानं नात्मन: कुलम्।
यो नृशंसस्वभावेन मां प्रार्थयितुमिच्छति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यह राक्षस अपने क्रूर स्वभाव के कारण न तो मेरे मना करने पर ध्यान देता है, न अपने महत्व को समझता है, न अपने कुल की प्रतिष्ठा का विचार करता है। यह बार-बार मुझे वश में करने की इच्छा रखता है॥9॥
 
‘This demon, due to his cruel nature, neither pays heed to my refusal, nor does he understand his own importance, nor does he think about the prestige of his clan. He repeatedly wishes to possess me.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)