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ramayan 5.26.49: मैं अपने प्रियतम भगवान् रामजी से विमुख हो गया हूँ और पापी रावण के चंगुल में पड़ गया हूँ; अतः अब मैं इस जीवन का त्याग करूँगा॥ 49॥   |   ramayan सर्ग 5.26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.26.49 
साहं त्यक्ता प्रियेणैव रामेण विदितात्मना।
प्राणांस्त्यक्ष्यामि पापस्य रावणस्य गता वशम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
मैं अपने प्रियतम भगवान् रामजी से विमुख हो गया हूँ और पापी रावण के चंगुल में पड़ गया हूँ; अतः अब मैं इस जीवन का त्याग करूँगा॥ 49॥
 
I have been separated from my beloved, the enlightened Lord Rama, and have fallen into the clutches of the sinful Ravana; therefore, I shall now give up this life.'॥ 49॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे षड‍‍्विंश: सर्ग:॥ २६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें छब्बीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ २६॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)