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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.26.46 
साहमेवंविधे काले मर्तुमिच्छामि सर्वत:।
न च मे विहितो मृत्युरस्मिन् दु:खेऽतिवर्तति॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
'इसलिए, ऐसे समय में मैं हर संभव तरीके से अपने जीवन का अंत करना चाहता हूं; लेकिन ऐसा लगता है कि इस महान दुःख में होने के बावजूद, मेरी मृत्यु अभी तक नहीं लिखी गई है।
 
‘Therefore, at such a time I desire to end my life in every possible way; but it seems that even though I am in this great sorrow, my death is not yet written.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)